राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश, नड्डा बोले- जमीन माफियाओं ने काफी मलाई खाई

नई दिल्ली। विवादित वक्फ संसोधन बिल लोकसभा से पास होने के बाद अब राज्यसभा में पेश कर दिया गया है। बिल पर चर्चा शुरू हो गई है। इधर आज राज्यसभा में हंगामा जारी है। विवादित वक्फ संसोधन बिल लोकसभा में बुधवार को 12 घंटे की चर्चा के बाद पास हो गया। रात 2 बजे में वोटिंग में 520 सांसदों ने भाग लिया। इसमें 288 ने पक्ष में और 232 ने विपक्ष में मतदान किया।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर राज्यसभा में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हमने इस विधेयक में अपील का अधिकार शामिल किया है। अगर आपको ट्रिब्यूनल में अपना अधिकार नहीं मिलता है, तो आप इस अपील के अधिकार के तहत अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं। मैं तो चाहता हूं कि कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का समर्थन करें।
रिजिजू ने आगे कहा कि संशोधित विधेयक में कोई भी गैर-मुस्लिम मुसलमानों की धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। हमने ट्रांसपैरेंसी, अकाउंटेबिलिटी, एक्यूरेसी का ध्यान रखते हुए बदलाव किए हैं। हम किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीब मुसलमानों को न्याय मिले।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर राज्यसभा में बोलते हुए जेपी नड्डा ने सरकारी संपत्तियों को वक्फ घोषित किए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक डोमेन में दिल्ली की 123 संपत्तियां वक्फ घोषित की गई हैं। कर्नाटक में भी झील, मंदिर, कृषि भूमि, सरकारी जमीन को भी वक्फ घोषित किया गया। ये गलत चल रहा था। इसे हम ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें कांग्रेस पार्टी को भी साथ देने की आवश्यकता है। जमीन माफियाओं ने काफी मलाई खाई है। उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी मलाईखोरों से दूर रहे।
जेपी नड्डा ने कहा, इस बिल के जरिए हमने प्रयास किया है कि अधिक से अधिक मुस्लिम समुदाय का, वक्फ की प्रॉपर्टी का सही उपयोग हो सके। इस बिल में उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रॉपर्टी सही हाथों में रहे।
बता दें कि केंद्र सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के द्वारा वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उसके प्रशासन में सुधार करना चाहती है। यह बिल वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करता है, इस बिल में वक्फ की परिभाषा को अपडेट करना, पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार के साथ तकनीक का उपयोग बढ़ाना भी शामिल है। लेकिन इसे लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह बिल असंवैधानिक है और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को कमजोर करता है।